महाभारत 12.263.25
धर्मेऽस्य रमतां बुद्धिर्धर्मं चैवोपजीवतुधर्मप्रधानो भवतु ममैषोऽनुग्रहो मतः
dharme'sya ramatāṃ buddhirdharmaṃ caivopajīvatudharmapradhāno bhavatu mamaiṣo'nugraho mataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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