महाभारत 12.265.13
य एतान्प्रज्ञया दोषान्पूर्वमेवानुपश्यतिकुशलः सुखदुःखानां साधूंश्चाप्युपसेवते
ya etānprajñayā doṣānpūrvamevānupaśyatikuśalaḥ sukhaduḥkhānāṃ sādhūṃścāpyupasevate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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