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महाभारत 12.27.29
सर्वे क्षयान्ता निचयाः पतनान्ताः समुच्छ्रयाःसंयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं हि जीवितम्
sarve kṣayāntā nicayāḥ patanāntāḥ samucchrayāḥsaṃyogā viprayogāntā maraṇāntaṃ hi jīvitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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