महाभारत 12.270.5
न गच्छन्ति पुनर्भावं मुनयः संशितव्रताःकदा वयं भविष्यामो राज्यं हित्वा परंतप
na gacchanti punarbhāvaṃ munayaḥ saṃśitavratāḥkadā vayaṃ bhaviṣyāmo rājyaṃ hitvā paraṃtapa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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