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महाभारत 12.271.69
प्रजाविसर्गं च सुखेन काले; प्रत्येत्य देवेषु सुखानि भुक्त्वासुखेन संयास्यथ सिद्धसंख्यां; मा वो भयं भूद्विमलाः स्थ सर्वे
prajāvisargaṃ ca sukhena kāle; pratyetya deveṣu sukhāni bhuktvāsukhena saṃyāsyatha siddhasaṃkhyāṃ; mā vo bhayaṃ bhūdvimalāḥ stha sarve
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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