महाभारत 12.274.55
एतन्माहेश्वरं तेजो ज्वरो नाम सुदारुणःनमस्यश्चैव मान्यश्च सर्वप्राणिभिरीश्वरः
etanmāheśvaraṃ tejo jvaro nāma sudāruṇaḥnamasyaścaiva mānyaśca sarvaprāṇibhirīśvaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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