महाभारत 12.275.6उपक्रमानहं वेद पुनरेव फलोदयान्लोके फलानि चित्राणि ततो न विमना ह्यहम्upakramānahaṃ veda punareva phalodayānloke phalāni citrāṇi tato na vimanā hyahamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें