महाभारत 12.275.8विहितेनैव जीवन्ति अरोगाङ्गा दिवौकसःबलवन्तोऽबलाश्चैव तद्वदस्मान्सभाजयvihitenaiva jīvanti arogāṅgā divaukasaḥbalavanto'balāścaiva tadvadasmānsabhājayaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें