महाभारत 12.28.15
न कश्चिज्जात्वतिक्रामेज्जरामृत्यू ह मानवःअपि सागरपर्यन्तां विजित्येमां वसुंधराम्
na kaścijjātvatikrāmejjarāmṛtyū ha mānavaḥapi sāgaraparyantāṃ vijityemāṃ vasuṃdharām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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