महाभारत 12.280.7
पापानुबन्धं यत्कर्म यद्यपि स्यान्महाफलम्न तत्सेवेत मेधावी शुचिः कुसलिलं यथा
pāpānubandhaṃ yatkarma yadyapi syānmahāphalamna tatseveta medhāvī śuciḥ kusalilaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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