महाभारत 12.285.16
एते स्वां प्रकृतिं प्राप्ता वैदेह तपसोऽऽश्रयात्प्रतिष्ठिता वेदविदो दमे तपसि चैव हि
ete svāṃ prakṛtiṃ prāptā vaideha tapaso''śrayātpratiṣṭhitā vedavido dame tapasi caiva hi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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