महाभारत 12.285.4
सुक्षेत्राच्च सुबीजाच्च पुण्यो भवति संभवःअतोऽन्यतरतो हीनादवरो नाम जायते
sukṣetrācca subījācca puṇyo bhavati saṃbhavaḥato'nyatarato hīnādavaro nāma jāyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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