महाभारत 12.285.7
चतुर्णामेव वर्णानामागमः पुरुषर्षभअतोऽन्ये त्वतिरिक्ता ये ते वै संकरजाः स्मृताः
caturṇāmeva varṇānāmāgamaḥ puruṣarṣabhaato'nye tvatiriktā ye te vai saṃkarajāḥ smṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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