महाभारत 12.285.9
आयोगाः करणा व्रात्याश्चण्डालाश्च नराधिपएते चतुर्भ्यो वर्णेभ्यो जायन्ते वै परस्परम्
āyogāḥ karaṇā vrātyāścaṇḍālāśca narādhipaete caturbhyo varṇebhyo jāyante vai parasparam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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