महाभारत 12.29.108
शतं गवां सहस्राणि शतमश्वशतानि चउत्थायोत्थाय वै प्रादात्सहस्रं परिवत्सरान्
śataṃ gavāṃ sahasrāṇi śatamaśvaśatāni cautthāyotthāya vai prādātsahasraṃ parivatsarān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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