महाभारत 12.29.110
सौवर्णां पृथिवीं कृत्वा दशव्यामां द्विरायताम्दक्षिणामददद्राजा वाजिमेधमहामखे
sauvarṇāṃ pṛthivīṃ kṛtvā daśavyāmāṃ dvirāyatāmdakṣiṇāmadadadrājā vājimedhamahāmakhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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