महाभारत 12.29.76
यं दृष्ट्वा पितुरुत्सङ्गे शयानं देवरूपिणम्अन्योन्यमब्रुवन्देवाः कमयं धास्यतीति वै
yaṃ dṛṣṭvā piturutsaṅge śayānaṃ devarūpiṇamanyonyamabruvandevāḥ kamayaṃ dhāsyatīti vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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