महाभारत 12.290.12
स्वर्गस्य च गुणान्कृत्स्नान्दोषान्सर्वांश्च भारतवेदवादे च ये दोषा गुणा ये चापि वैदिकाः
svargasya ca guṇānkṛtsnāndoṣānsarvāṃśca bhāratavedavāde ca ye doṣā guṇā ye cāpi vaidikāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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