Loading
महाभारत 12.290.20
विष्णुं क्रान्ते बले शक्रं कोष्ठे सक्तं तथानलम्अप्सु देवीं तथा सक्तामपस्तेजसि चाश्रिताः
viṣṇuṃ krānte bale śakraṃ koṣṭhe saktaṃ tathānalamapsu devīṃ tathā saktāmapastejasi cāśritāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें