महाभारत 12.290.5
ज्ञानेन परिसंख्याय सदोषान्विषयान्नृपमानुषान्दुर्जयान्कृत्स्नान्पैशाचान्विषयांस्तथा
jñānena parisaṃkhyāya sadoṣānviṣayānnṛpamānuṣāndurjayānkṛtsnānpaiśācānviṣayāṃstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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