Loading
महाभारत 12.291.38
यदमूर्त्यसृजद्व्यक्तं तत्तन्मूर्त्यधितिष्ठतिचतुर्विंशतिमो व्यक्तो ह्यमूर्तः पञ्चविंशकः
yadamūrtyasṛjadvyaktaṃ tattanmūrtyadhitiṣṭhaticaturviṃśatimo vyakto hyamūrtaḥ pañcaviṃśakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें