महाभारत 12.294.40
अव्यक्तं क्षेत्रमित्युक्तं तथा सत्त्वं तथेश्वरम्अनीश्वरमतत्त्वं च तत्त्वं तत्पञ्चविंशकम्
avyaktaṃ kṣetramityuktaṃ tathā sattvaṃ tatheśvaramanīśvaramatattvaṃ ca tattvaṃ tatpañcaviṃśakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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