महाभारत 12.3.31
अन्यत्र वधकालात्ते सदृशेन समेयुषःअब्राह्मणे न हि ब्रह्म ध्रुवं तिष्ठेत्कदाचन
anyatra vadhakālātte sadṛśena sameyuṣaḥabrāhmaṇe na hi brahma dhruvaṃ tiṣṭhetkadācana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें