महाभारत 12.3.32
गच्छेदानीं न ते स्थानमनृतस्येह विद्यतेन त्वया सदृशो युद्धे भविता क्षत्रियो भुवि
gacchedānīṃ na te sthānamanṛtasyeha vidyatena tvayā sadṛśo yuddhe bhavitā kṣatriyo bhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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