महाभारत 12.30.37
तव नैतद्धि सदृशं पुत्रस्थाने हि मे भवान्निवर्तयेतां तौ शापमन्योऽन्येन तदा मुनी
tava naitaddhi sadṛśaṃ putrasthāne hi me bhavānnivartayetāṃ tau śāpamanyo'nyena tadā munī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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