महाभारत 12.30.5
मातुलो भागिनेयश्च देवलोकादिहागतौविहर्तुकामौ संप्रीत्या मानुष्येषु पुरा प्रभू
mātulo bhāgineyaśca devalokādihāgatauvihartukāmau saṃprītyā mānuṣyeṣu purā prabhū
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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