महाभारत 12.301.6
चक्षुरध्यात्ममित्याहुर्यथाश्रुतिनिदर्शनम्रूपमत्राधिभूतं तु सूर्यस्तत्राधिदैवतम्
cakṣuradhyātmamityāhuryathāśrutinidarśanamrūpamatrādhibhūtaṃ tu sūryastatrādhidaivatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें