महाभारत 12.302.5
द्वंद्वमेषां त्रयाणां तु संनिपातं च तत्त्वतःसत्त्वस्य रजसश्चैव तमसश्च शृणुष्व मे
dvaṃdvameṣāṃ trayāṇāṃ tu saṃnipātaṃ ca tattvataḥsattvasya rajasaścaiva tamasaśca śṛṇuṣva me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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