महाभारत 12.306.24
शिष्याणामखिलं कृत्स्नमनुज्ञातं ससंग्रहम्सर्वे च शिष्याः शुचयो गताः परमहर्षिताः
śiṣyāṇāmakhilaṃ kṛtsnamanujñātaṃ sasaṃgrahamsarve ca śiṣyāḥ śucayo gatāḥ paramaharṣitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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