महाभारत 12.306.45
गुणक्षयत्वात्प्रकृतिः कर्तृत्वादक्षयं बुधाःएषा तेऽऽन्वीक्षिकी विद्या चतुर्थी सांपरायिकी
guṇakṣayatvātprakṛtiḥ kartṛtvādakṣayaṃ budhāḥeṣā te''nvīkṣikī vidyā caturthī sāṃparāyikī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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