महाभारत 12.306.63
न तवाविदितं किंचिद्भवाञ्श्रुतिनिधिः स्मृतःकथ्यते देवलोके च पितृलोके च ब्राह्मण
na tavāviditaṃ kiṃcidbhavāñśrutinidhiḥ smṛtaḥkathyate devaloke ca pitṛloke ca brāhmaṇa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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