महाभारत 12.308.110
विंशकश्चैष संघातो महाभूतानि पञ्च चसदसद्भावयोगौ च गुणावन्यौ प्रकाशकौ
viṃśakaścaiṣa saṃghāto mahābhūtāni pañca casadasadbhāvayogau ca guṇāvanyau prakāśakau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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