महाभारत 12.308.183
द्रोणश्च शतशृङ्गश्च वक्रद्वारश्च पर्वतःमम सत्रेषु पूर्वेषां चिता मघवता सह
droṇaśca śataśṛṅgaśca vakradvāraśca parvataḥmama satreṣu pūrveṣāṃ citā maghavatā saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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