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महाभारत 12.308.38
मोक्षे हि त्रिविधा निष्ठा दृष्टा पूर्वैर्महर्षिभिःज्ञानं लोकोत्तरं यच्च सर्वत्यागश्च कर्मणाम्
mokṣe hi trividhā niṣṭhā dṛṣṭā pūrvairmaharṣibhiḥjñānaṃ lokottaraṃ yacca sarvatyāgaśca karmaṇām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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