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महाभारत 12.308.56
न च कामसमायुक्ते मुक्तेऽप्यस्ति त्रिदण्डकम्न रक्ष्यते त्वया चेदं न मुक्तस्यास्ति गोपना
na ca kāmasamāyukte mukte'pyasti tridaṇḍakamna rakṣyate tvayā cedaṃ na muktasyāsti gopanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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