महाभारत 12.31.38
ततस्ता मातरस्तस्य रुदन्त्यः शोककर्शिताःअभ्यधावन्त तं देशं यत्र राजा स सृञ्जयः
tatastā mātarastasya rudantyaḥ śokakarśitāḥabhyadhāvanta taṃ deśaṃ yatra rājā sa sṛñjayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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