महाभारत 12.31.45उत्पाद्य च बहून्पुत्रान्कुलसंतानकारिणःकालेन महता राजन्कालधर्ममुपेयिवान्utpādya ca bahūnputrānkulasaṃtānakāriṇaḥkālena mahatā rājankāladharmamupeyivānइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें