महाभारत 12.310.26
एवंविधेन तपसा तस्य भक्त्या च भारतमहेश्वरः प्रसन्नात्मा चकार मनसा मतिम्
evaṃvidhena tapasā tasya bhaktyā ca bhāratamaheśvaraḥ prasannātmā cakāra manasā matim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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