महाभारत 12.310.8
इन्द्रियाणां प्रसङ्गेन दोषमृच्छत्यसंशयम्संनियम्य तु तान्येव सिद्धिं प्राप्नोति मानवः
indriyāṇāṃ prasaṅgena doṣamṛcchatyasaṃśayamsaṃniyamya tu tānyeva siddhiṃ prāpnoti mānavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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