महाभारत 12.313.29
सर्वभूतेषु चात्मानं सर्वभूतानि चात्मनिसंपश्यन्नोपलिप्येत जले वारिचरो यथा
sarvabhūteṣu cātmānaṃ sarvabhūtāni cātmanisaṃpaśyannopalipyeta jale vāricaro yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें