महाभारत 12.313.34
यदा भावं न कुरुते सर्वभूतेषु पापकम्कर्मणा मनसा वाचा ब्रह्म संपद्यते तदा
yadā bhāvaṃ na kurute sarvabhūteṣu pāpakamkarmaṇā manasā vācā brahma saṃpadyate tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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