महाभारत 12.314.36
ऊचुस्ते सहिता राजन्निदं वचनमुत्तमम्यदि प्रीत उपाध्यायो धन्याः स्मो मुनिसत्तम
ūcuste sahitā rājannidaṃ vacanamuttamamyadi prīta upādhyāyo dhanyāḥ smo munisattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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