महाभारत 12.314.48
यश्चाधर्मेण विब्रूयाद्यश्चाधर्मेण पृच्छतितयोरन्यतरः प्रैति विद्वेषं वाधिगच्छति
yaścādharmeṇa vibrūyādyaścādharmeṇa pṛcchatitayoranyataraḥ praiti vidveṣaṃ vādhigacchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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