महाभारत 12.315.15
ऋषयश्च हि देवाश्च गन्धर्वाश्च महौजसःविमुक्ता ब्रह्मघोषेण न भ्राजन्ते यथा पुरा
ṛṣayaśca hi devāśca gandharvāśca mahaujasaḥvimuktā brahmaghoṣeṇa na bhrājante yathā purā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें