महाभारत 12.316.15
इन्द्रियैरिन्द्रियार्थेभ्यश्चरत्यात्मवशैरिहअसज्जमानः शान्तात्मा निर्विकारः समाहितः
indriyairindriyārthebhyaścaratyātmavaśairihaasajjamānaḥ śāntātmā nirvikāraḥ samāhitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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