महाभारत 12.318.22
निर्दग्धं परदेहेन परदेहं चलाचलम्विनश्यन्तं विनाशान्ते नावि नावमिवाहितम्
nirdagdhaṃ paradehena paradehaṃ calācalamvinaśyantaṃ vināśānte nāvi nāvamivāhitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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