महाभारत 12.318.4व्याधितस्य विवित्साभिस्त्रस्यतो जीवितैषिणःअवशस्य विनाशाय शरीरमपकृष्यतेvyādhitasya vivitsābhistrasyato jīvitaiṣiṇaḥavaśasya vināśāya śarīramapakṛṣyateइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें