महाभारत 12.320.5
द्रुमाः शाखाश्च मुमुचुः शिखराणि च पर्वताःनिर्घातशब्दैश्च गिरिर्हिमवान्दीर्यतीव ह
drumāḥ śākhāśca mumucuḥ śikharāṇi ca parvatāḥnirghātaśabdaiśca girirhimavāndīryatīva ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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