महाभारत 12.322.24
पञ्चरात्रविदो मुख्यास्तस्य गेहे महात्मनःप्रायणं भगवत्प्रोक्तं भुञ्जते चाग्रभोजनम्
pañcarātravido mukhyāstasya gehe mahātmanaḥprāyaṇaṃ bhagavatproktaṃ bhuñjate cāgrabhojanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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