महाभारत 12.322.44
युष्मत्कृतमिदं शास्त्रं प्रजापालो वसुस्ततःबृहस्पतिसकाशाद्वै प्राप्स्यते द्विजसत्तमाः
yuṣmatkṛtamidaṃ śāstraṃ prajāpālo vasustataḥbṛhaspatisakāśādvai prāpsyate dvijasattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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